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शान्त चित्त अनचाहा तूफ़ान

August 20, 2025

शान्त चित्त अनचाहा तूफ़ान
चंचल जीवन की अनंत उड़ान।
चाह क्षितिज को पाने की
घनघोर निमिष में छाने की।
राह कठिन सांसे गिनती की
कब घूमेगी जीवन की फिरकी।
नहीं किसी को इसका भान
शान्त चित्त अनचाहा तूफ़ान ........

सूर्य उगे तब हो सवेरा ?
जल बरसे तब बने बसेरा ?
ठीक नहीं ये जीवन फेरा
ये कैसी होनी अनजान।
शान्त चित्त अनचाहा तूफ़ान ........

जीवन है या मृत्यु है सत्य ?
ढूंढ रहा अपनी गत्य।
रात्रि है शीतल, मन है विह्वल
पता नहीं किसका अभिमान
शान्त चित्त अनचाहा तूफ़ान ........

धरती ढूँढू या आकाश ?
कहाँ सत्य तेरा आवास ?
मुझमें तू या तुझमें मै ?
कैसे हो इसकी पहचान ?
शान्त चित्त अनचाहा तूफ़ान ........