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August 20, 2025
अनजाने लोग अनजाने शब्द
सम्मुख है सत्य, पर स्तब्ध।
जीवन हुआ अनंत
न शुरुआत का पता, न अंत।
परिकल्पनाएं जागी, कल्पनाएं सोइ
भंगिताएं सजी, भावनाएं सोइ।
राग हसे , पर रागिनी मुरझाई
शब्द मिले पर कविता न बन पाई।
पता नहीं मुझमें और मेरे सत्य में कितनी दूरी हैं ?
कहा से आएं उत्तर जो सत्य के लिए जरूरी है।